Monday, March 23, 2009

वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी....

ये दौलत भी ले लो ये शौहरत भी ले लो...
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी...
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन...
वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी....


ये दौलत भी ले लो ये शौहरत भी ले लो...
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी...
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन...
वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी....

वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी....

मोहल्ले की सबसे निशानी पुराणी..
वो बुधिया जिसे बच्चे कहते थे नानी...
वो नानी की बातों में परिओं का डेरा..
वो चहरे की झुरियों में सदियों का फेरा...
भुलाएँ नहीं भूल सकता हैं कोई
वो छोटी सी रातें वो लम्बी कहानी...

वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी....
वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी....

कड़ी धुप में अपने घर से निकलना...
वो चिडियां वो बुलबुल वो तितली पकड़ना...
वो बुधिया की शादी पे लड़ना झगड़ना..
वो झूलों से गिरना, गिरकर संभलना...
वो पीतल के छलों के प्यारे से तोफे,
वो टूटी हुई चूडियों की निशानी...

वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी....
वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी....